“निरोगी शरीर” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक संपूर्ण स्वास्थ्य संहिता है, जो आपको डॉक्टर और दवाओं पर निर्भरता से मुक्त करने में मदद करेगी। यह पुस्तक 180 पृष्ठों में एक समग्र जीवनशैली का परिचय कराती है, जो शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने पर केंद्रित है।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो आधुनिक जीवनशैली के दुष्प्रभावों से थक चुके हैं और अब प्राकृतिक, आयुर्वेदिक और सत्विक जीवन जीने के इच्छुक हैं। इसमें आयुर्वेद, योग और प्राचीन भारतीय ज्ञान के माध्यम से स्वस्थ जीवन का सरल मार्ग बताया गया है।
🔍 पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:
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आयुर्वेद का परिचय और शरीर की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) की पहचान और उनके लक्षणों की सरल व्याख्या।
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दिनचर्या और ब्रह्म मुहूर्त के लाभ, दाँत और जीभ की सफाई, और ऑयल पुलिंग जैसी दैनिक आदतों का महत्व।
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शरीर के विभिन्न अंगों की देखभाल – आँख, नाक, कान, त्वचा और बाल।
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योग, प्राणायाम और व्यायाम से होने वाले लाभ।
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तेल मालिश और स्नान के सही तरीके।
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भोजन और आहार से जुड़ी गहराई बातें – दोषों के अनुसार भोजन, विरुद्ध आहार, मौसमी भोजन और भोजन के बर्तन का चुनाव।
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उपवास और नींद की विधि, दूध पीने के नियम, ब्रह्मचर्य का महत्व और मानसिक शांति के उपाय।
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ऋतुचर्या और 6 ऋतुओं के अनुसार सर्वश्रेष्ठ भोजन का विवरण।
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रसोई में मौजूद 48 घरेलू औषधियाँ ।
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बढ़ते कैंसर के कुछ प्रमुख कारण और जीवनशैली से जुड़ी सावधानियाँ।
हम रोज़मर्रा की जिन छोटी-छोटी बातों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, उन्हीं का असर हमारे स्वास्थ्य पर गहराई से पड़ता है। इन बातों को यदि सुधारा जाए, तो स्वास्थ्य में उल्लेखनीय और सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है।
यदि आप दवाओं से दूरी बनाकर केवल जीवनशैली में बदलाव द्वारा निरोग रहना चाहते हैं, तो “निरोगी शरीर” आपके लिए एक मार्गदर्शक ग्रंथ सिद्ध हो सकता है।
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